तेरे ही नाम से ज़ाना जाता हूं मैं,
ना जाने ये ” शोहरत” है या     “बदनामी”…

बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं..
अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती…!!