कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझको अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझको वादा उतना ही करो जितना नीभा सकते हो ख़्वाब पूरा जो न हो वो न दीखाना मुझको