उतरे जो ज़िन्दगी तेरी गहराइयों में। महफ़िल में रह के भी रहे तनहाइयों में इसे दीवानगी नहीं तो और क्या कहें। प्यार ढुढतेँ रहे परछाईयों मेँ।